मध्य प्रदेश
July 24, 2018 • Rajeev Kumar Thakur

उज्जैन में इस माह शुरू होने वाले सिंहस्थ कुंभ में अब कुछ ही दिन शेष बचे हैं। कुंभ मेला को लेकर प्रशासन और व्यवस्थापक सकते में हैं। वह इसलिए नहीं कि इतना बड़ा आयोजन कैसे सफल होगा।चिंता का विषय कुछ और ही है और वह है किन्नरों संग परंपरागत अखाड़ों की संभावित भिडंत। यह शायद इतिहास में पहली बार है जब किन्नरों ने अखाड़ा बनाया है और वह 13 अन्य अखाड़ों की तरह ही शाही स्नान को लेकर तैयारी कर रहे हैं। कुंभ मेला के पहले उज्जैन के डिविजनल कमिश्नर ने 13 अखाड़ों को जमीन दे दी है। शाही स्नान के दिन अखाड़ों में शामिल संत पवित्र नदी में डुबकी लगाते हैं, जिसे शाही स्नान कहा जाता है। सिंहस्थ 2016 की शुरुआत 22 |अप्रैल को होगी और यह 21 मई तक चलेगा। कुंभ मेला हिंदुओं की श्रद्धा का प्रतीक है और इस मौके पर बड़ी संख्या में हिंदू जमा होते हैं। कुंभ का आयोजन 12 सालों में एक बार होता है। पिछले साल दिसंबर में 22 राज्यों के किन्.

 

पिछले साल दिसंबर में 22 राज्यों के किन्. नरों के प्रतिनिधियों ने अखाड़ा का गठन किया ताकि वह सिंहस्थ 2016 में शाही स्नान कर सके। उज्जैन जिले के हसमपुरा गांव में दो दिनों की बैठक के दौरान किन्नर अखाड़ा अस्तित्व में आया और इसके बाद तुरंत उन्होंने सिंहस्थ मेला समिति और स्थानीय प्रशासन से संपर्क कर उनसे जमीन के एक टुकड़े की मांग की। चूंकि पहले से 13 अखाड़ों को जमीन दी जा चुकी थी इसलिए उन्होंने भी इसी आधार पर प्रशासन और मेला समिति से जमीन की मांग की। हाल ही में प्रशासन ने किन्नर अखाड़ा को हाल ही में प्रशासन ने किन्नर अखाड़ा को पांच एकड़ जमीन आवंटित की है। इन अखाड़ों को लेकर तेजी से काम चल रहा है। माना जा रहा है कि इस अखाड़े में करीब लाखों की संख्या में किन्नरों के जुटने की संभावना है। हालांकि उम्मीद के मुताबिक इस अखाड़े का विरोध शुरू हो गया है। भाजपा की छात्र इकाई एबीवीपी के सदस्यों ने इसका विरोध शुरू कर दिया है। 13 अखाड़े शाही स्नान में किन्, नरों के भाग लेने का विरोध कर रहे हैं। उन्होंने किन्नरों के अखाड़े को मान्यता देने से भी इंकार कर दिया है। हालांकि उनके इस फैसले से किन्नर बेप. रवाह दिखाई दे रहे हैं। किन्नर अखाड़ा के आयोजक ऋषि अजय दास ने कहा, 'हमें जमीन मिली है जहां पर निर्माण कार्य तेजी से चल रहा है। हालांकि हमें मेला प्रशासन की तरफ से नागरिक सुविधाएं नहीं मिल रही है। दास ने कहा, “हम राम के मौलिक भक्त हैं और हमें शाही स्नान में भाग लेने के लिए एबीवीपी की मंजूरी की जरूरत नहीं है।' दास रामायण की कहानी का हवाला देते

दास रामायण की कहानी का हवाला देते हुए कहते हैं कि जब राम वनवास गए तो उन्होंने अपने सभी पुरुष और महिला समर्थकों से घर जाने को कहा। लेकिन किन्नर समुदाय ने उनके लौटने के 14 सालों तक राम का इंत. जार किया। जब राम लौटे तो उन्होंने सरयू के किनारे किन्नरों को उनका इंतजार करते पाया। किन्नरों की भक्ति से खुश होकर भगवान राम ने उन्हें आशीर्वाद दिया था। गौरतलब है कि मध्य प्रदेश देश का इकलौता ऐसा राज्य है जहां किन्नरों ने चुनाव तक जीता है। शबनम मौसी 1998 में सुहागपुर से विधायक का चुनाव जीत चुकी हैं। मौसी ने विधानसभा में अपनी जबरदस्त पहचान बनाई और उन्होंने अक्सर दिग्विजय सिंह सरकार की नीतियों पर गंभीर सवाल उठाए।

मौसी की जीत के बाद अन्य किन्नर कमला जान भी जबलपुर की मेयर चुनी गईं। इसके बाद बाद दिसंबर 2009 में कमला बुआ सागर नगर निगम की मेयर बनीं। दोनों ही मामले में नेताओं को अपनी कुर्सी छोड़नी पड़ी क्योंकि तब तक सुप्रीम कोर्ट का फैसला नहीं आया था जिससे उन्हें थर्ड जेंडर के तौर पर मान्यता मिलती।